गर्व के साथ स्वागत है, एक ऐसे गौरवशाली समाज की ओर जिस समाज के 18000 परिवार 9000 खेडुवा ब्राह्मणों के साथ 850 वर्ष पूर्व मात्र राज परिवार से दोस्ती टूटने के कारण खेड़ब्रह्मा से पलायन कर राजस्थान के सागवाडा में स्थापित हो कर आज भी देश के कोने कोने में प्राचीन इतिहास के साथ समाज की परम्पराओ, पूर्वजो की मान मर्यादाओ, गुरुओ की सेवाओ के साथ एक ऐसा अनुशासन संगठन संजोये रखा है, जहाँ देश की आजादी से 100 वर्ष पूर्व से संगठन के चुनाव होते आये है, जहाँ एक परिवार के नहीं, अपितु पुरे देश के दशाहुमड परिवारों के फैसले आज भी एक जाजम पर होते है |

साढ़े बारह मंदिर बंदीजी की परम्परा से चल रहा यह समाज बिना किसी भेदभाव, व्यक्तिवाद, क्षैत्रवाद से अलग अनेकान्तवाद पर चलने वाला हमारा दशाहुमड संगठन, राष्ट्र को समर्पित एक गौरवशाली समाज है |